देहरादून: जंगल की आग पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली फायर लाइनों के मामले में उत्तराखंड को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। वन विभाग की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फायर लाइनों पर उगे पेड़ों के निस्तारण की अनुमति दे दी है। इससे फायर लाइनों का उचित रखरखाव फायर ब्रेक के रूप में हो सकेगा। राज्य में फायर लाइनों की वर्तमान में कुल लंबाई 13917.1 किलोमीटर है। इसके साथ ही वन प्रबंधन के लिए राज्य को पर्याप्त बजट की उपलब्धता के दृष्टिगत केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्रतिउत्तर प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में हर साल जंगलों में आग से वन संपदा को भारी क्षति पहुंच रही है। यद्यपि, आग की रोकथाम को प्रयास हो रहे हैं, लेकिन फायर लाइनों के साफ न रहने से दिक्कत बढ़ गई थी। फायर लाइनें जंगलों में बनाए गए चौड़े रास्ते हैं, जिन्हें साफ रख आग को एक से दूसरे क्षेत्र में फैलने से रोका जाता है। अग्नि नियंत्रण का यह कारगर तरीका है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में दिक्कतें आ रही थीं । कारण ये कि वहां फायर लाइनों पर पेड़ उग आए हैं। पहाड़ में एक हजार मीटर से ऊपर पेड़ कटान पर प्रतिबंध के चलते इन्हें हटाना मुश्किल हो रहा था। इस सबके मद्देनजर वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें यह अनुरोध किया गया कि फायर लाइनों के उचित रखरखाव एवं इनमें प्राकृतिक रूप से उगे पेड़ों के आवश्यकतानुसार निस्तारण की अनुमति दी जाए।
