मोदी सरकार ने देश में न्यूक्लियर पॉवर कैपिसिटी का विस्तार किया , देश को नेट जीरो इकोनमी बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है

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भारत की अर्थव्यवस्था आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. सारी दुनिया आज भारत की आर्थिक प्रगति पर नजदीकी से नजर बनाए हुए है. देश की आर्थिक प्रगति के लिए सबसे अहम कारकों में एक है, बिजली की जरुरतों की पूर्ति. आज भारत में तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास और जनसंख्या की आवश्यकताओं ने बिजली क्षेत्र की अहमियत और बढ़ा दी है. आज भारत में विश्व की 17 फीसदी जनसंख्या रहती है. मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की बिजली उत्पादन क्षमता हर वर्ष 4 फीसदी की दर से बढ़ रही है और यह वैश्विक विकास दर 1.3 फीसदी से दोगुना से भी ज्यादा है. भारत अब कई रूप में बिजली पैदा कर रहा है. इसमें पारंपरिक कोयले से चलने वाले बिजली के संयंत्र, जल विद्युत परियोजनाएं और अन्य गैर पारंपरिक स्रोतों से बिजली उत्पादन सम्मिलित है. आजादी मिलने के बाद भारत ने बिजली उत्पादन में तेजी से बढ़ोत्तरी की है, लेकिन तत्कालीन सरकारों के कार्यकाल में न्यूक्लियर एनर्जी जैसे अहम और बिजली उत्पादन के अहम क्षेत्र की हमेशा उपेक्षा ही की गई. भारत प्रारंभ से ही फॉसिल फ्यूल संसाधनों के क्षेत्र में धनी राष्ट्र नहीं रहा है. भारत जैसे राष्ट्र में एनर्जी के सभी संसाधनों का अधिकतम और उत्कृष्ट प्रयोग हो ,ये बेहद आवश्यक है. एनर्जी के अन्य संसाधनों के मुकाबले में न्यूक्लियर एनर्जी क्लीन और इनवायरमेंट फ्रेंडली है. ये भारत जैसे बिजली की विशाल आवश्यकता वाले देश को लंबे समय में एनर्जी सिक्योरिटी प्रदान कर सकता है. देश में न्यूक्लियर पॉवर कैपिसिटी का विस्तार देश को नेट जीरो इकोनमी बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है. भारत में मार्च, 2022 को 6780 मेगावॉट की न्यूक्लियर पॉवर कैपिसिटी थी और कुल 22 ऑपरेशनल न्यूक्लियर पॉवर रियक्टर थे. इसके अतिरिक्त जनवरी 2021 में 700 मेगावाट के एक रियक्टर केएपीपी-3 को ग्रिड से जोडा गया था. मोदी सरकार ने न्यूक्लिर एनर्जी पर जोर देते हुए वर्ष 2031 तक भारत की न्यूक्लियर पॉवर कैपिसिटी को बढाकर 22480 मेगावॉट की पहुंचाने की योजना पर काम करना शुरु किया है.

मोदी सरकार ने देश में तेजी से न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता बढ़ाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना के अनुरुप 8700 मेगावॉट की क्षमता वाले 11 रियक्टर के निर्माण कार्यो पर बल दिया है. इसके साथ ही मोदी सरकार ने 700 मेगॉवाट की कैपिसिटी वाले 10 स्वदेशी प्रेसराइज्जड हेवी वॉटर रियक्टर को निर्माण को भी अनुमति प्रदान की है.

मोदी सरकार ने इसके साथ ही भविष्य में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट स्थापित करने के लिए 5 नई साइट को सैद्धांतिक मंजूरी भी दी है. मोदी सरकार इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा की प्रति अपने उत्तरदायित्व को पूर्ण करने के लिए 300 मेगावॉट की कैपिसिटी वाले स्मॉल माड्यूल रियक्टर (एसएमआर) के विकास पर भी जोर दे रही है. ये रियक्टर डिजायन में फ्लैक्सीबल होते हैं और उन्हें कम फुटप्रिंट की जरुरत होती है. ये फैक्ट्ररी बिल्ट रियक्टर निर्माण लागत में काफी किफायती साबित होते हैं और बड़े न्यूक्लियर प्लांट के मुकाबले अधिक सरल और सुरक्षित होते हैं.

वर्ष 2014 में पीएम मोदी के कार्यभार संभालने के बाद देश में न्यूक्लियर पॉवर कैपिसिटी में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई. वर्ष 2013-14 में भारत में वार्षिक न्यूक्लियर पॉवर जेनरेशन जहां सिर्फ 35,333 मिलियन यूनिट था वहीं वर्ष 2021-22 में ये बढ़कर 47,112 मिलियन यूनिट के स्तर पर पहुंच गया. सिर्फ साढ़े आठ साल के छोटे कार्यकाल में ही इसमें लगभग 30 से 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई. पीएम मोदी के कार्यभार संभालने से पहले जहां सिर्फ 22 रियक्टर काम कर रहे थे,वहीं मोदी सरकार ने वर्ष 2017 में 1,05,000 करोड की कुल लागत से 7 हजार मेगावॉट की कैपिसिटी वाले 11 रियक्टर के निर्माण को मंजूरी दी.

यहीं नही मोदी सरकार ने एक ओर क्रांतिकारी फैसला लेते हुए वर्ष 2015 के न्यूक्लियर कार्यक्रम को बढ़ाने के लिए पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) के साथ ज्वाइंट वेंचर को भी अनुमति प्रदान की. विपक्षी सरकार के शासनकाल में भारत के न्यूक्लियर संयंत्र जहां केवल दक्षिण भारत या महाराष्ट्र और गुजरात तक सीमित थे वहीं मोदी सरकार ने इसके विस्तार को देश के अन्य भागों तक भी पहुंचाया.

मोदी सरकार की इन स्पष्ट और दूरगामी नीतियो के परिणामस्वरुप भारत आज तेजी से न्यूक्लियर पॉवर जेनरेशन में बढ़ोत्तरी कर रहा है. ये सफलता भारत की आर्थिक प्रगति को सबल देने के साथ देश में एनर्जी की बढ़ती मांग को भी किफायती खर्च पर पूरा कर सकेगी.

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