प्रदेश में अब उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि की कमी सामने आ रही है। इसे देखते हुए सरकार ने अब निजी क्षेत्र में उद्योग विभाग के सहयोग से औद्योगिक आस्थान खोलने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रस्तावित नीति को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत निजी औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के लिए पर्वतीय क्षेत्र में दो एकड़ और मैदानी क्षेत्र में 30 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी।
यहां की सड़क, पानी और बिजली आदि की व्यवस्था औद्योगिक विकास विभाग करेगा। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि बाहरी व्यक्ति भी निजी औद्योगिक अस्थान खोल सकता है। हालांकि, इसके लिए उसे स्थानीय व्यक्तियों को साथ लेकर सोसायटी या ट्रस्ट बनाकर कार्य करना होगा।
बुधवार को कैबिनेट ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की निजी क्षेत्र में औद्योगिक आस्थानों, क्षेत्रों की स्थापना के लिए नीति को मंजूरी दी। विभाग में पहले भी पर्वतीय क्षेत्रों में दो एकड़ भूमि पर निजी क्षेत्र द्वारा औद्योगिक आस्थान खोलने की व्यवस्था है, लेकिन मैदानी क्षेत्र के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई थी।
इस नीति में स्पष्ट किया गया है कि विनिर्माण उद्योग के साथ ही वस्त्र, एरोमा, ऑटोमोबाइल, आईटी, एयरोस्पेस एवं रक्षा, मेडिसिटी, फिल्म क्षेत्र आदि के विकास के लिए निजी क्षेत्रों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके तहत आईटी पार्क अथवा बायोटेक्नोलॉजी पार्क के लिए न्यूनतम 18 हजार वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल होना आवश्यक होगा। मैदानी क्षेत्र में वृहद औद्योगिक आस्थानों में न्यूनतम 10 स्वतंत्र इकाइयां तथा पर्वतीय क्षेत्र में मिनी औद्योगिक आस्थानों में न्यूनतम पांच स्वतंत्र इकाइयों की स्थापना के लिए भूमि दी जानी आवश्यक होगी।
निजी क्षेत्र को सरकार बुनियादी ढांचे के विकास को 10 लाख रुपये प्रति एकड़ और सीईटीपी संयंत्र पर किए जाने पर अचल पूंजी निवेश का 40 प्रतिशत व अधिकतम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगी।
