बिहार में गैंगवार और एसपी अमित लोढ़ा का वो सच जिस पर बनी है ‘खाकी: द बिहार चैप्टर’

ओटीटी पर आई एक नई वेब सिरीज़ ‘खाकीः द बिहार चैप्टर’ इन दिनों सुर्ख़ियों में है.

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी अमित लोढ़ा ने अपराध, राजनीति और अपने अनुभवों पर ‘बिहार डायरीज़’ लिखी है.

ये वेब सिरीज़ इसी किताब पर आधारित है.

अमित लोढ़ा फ़िलहाल बिहार पुलिस में इंसपेक्टर जनरल (एससीआरबी) के पद पर तैनात हैं.

इस वेब सिरीज़ में आईपीएस अधिकारी का नाम भी अमित लोढ़ा ही है.

वेब सिरीज़ में दिखाया गया है कि कैसे बिहार के महतो गैंग ने एक ख़ास इलाक़े में अपने ख़ौफ़ का साम्राज्य स्थापित किया था और कैसे अमित लोढ़ा ने इन अपराधियों से इलाक़े के लोगों को मुक्ति दिलाई.

इस वेब सिरीज़ में अमित लोढ़ा के अलावा महतो गैंग के एक कैरेक्टर को दिखाया गया है जिसका नाम चंदन महतो है. असलियत में चंदन महतो का किरदार अशोक महतो गैंग के पिंटू महतो को लेकर बनाया गया है.

इसमें दिखाया गया है कि कैसे चंदन महतो का उदय हुआ और कैसे उसने अपने दम पर अपना साम्राज्य स्थापित किया था और कैसे आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा ने इस चुनौती का सामना किया.

फ़िल्म में अपराध जगत में भी अगड़ों और पिछड़ों की लड़ाई दिखाई गई है. साथ ही पुलिस व्यवस्था की ख़ामियों और राजनीतिक नेतृत्व पर भी टिप्पणी की गई है.

वेब सिरीज़ में अमित लोढ़ा का किरदार निभाया है करण टैकर ने जबकि चंदन महतो की भूमिका अविनाश तिवारी ने की है. सिरीज़ में आशुतोष राणा, रवि किशन, अनूप सोनी और विनय पाठक ने भी भूमिका निभाई है.

आइए जानते हैं कि इस वेब सिरीज़ में जिस महतो गैंग का ज़िक्र किया गया है और जिस आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा ने उसका सामना किया, उसकी हक़ीक़त क्या थी.

इस वेब सिरीज़ की घटनाएँ आज से क़रीब दो दशक पुरानी हैं.

एक समय था जब बिहार में शेखपुरा के आसपास के इलाक़े में गोलियों की आवाज़ का सुनाई देना आम बात थी. अंधेरा घिरने के बाद लोग घर से निकलने में भी घबराते थे.

कहा जाता है कि अमित लोढ़ा ने एसपी रहते हुए शेखपुरा के इस गैंगवार को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी.

अमित लोढ़ा फ़िलहाल बिहार पुलिस में इंस्पेक्टर जनरल (एससीआरबी) के पद पर तैनात हैं.

‘खाकीः द बिहार चैप्टर’ उस वक़्त की कहानी है, जब बिहार में राजनीति और अपराध की ख़बरें अक्सर सुर्खियों में होती थीं.

उस समय बिहार के शेखपुरा, नवादा और आसपास के इलाक़ों में भी जातीय वर्चस्व की लड़ाई की ख़बरें अक्सर सुनने को मिलती थीं.

इस लड़ाई में कई सरकारी अधिकारियों, व्यवसायियों और पूर्व सांसद राजो सिंह तक की हत्या हुई थी.

यही नहीं, आम लोग और बच्चों तक को इस गैंगवार में अपनी जान गँवानी पड़ी थी.

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कई हत्याएँ हुई थीं. अमित लोढ़ा को उसी वक़्त शेखपुरा एसपी के पद पर तैनात किया गया था.

इस वेब सिरीज़ में टाटी और मानिकपुर नरसंहार का भी ज़िक्र हुआ है.

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